लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी NCT बिल पास हुआ, दिल्ली सरकार को विधायिका से जुड़े 15 दिन और प्रशासनिक मामलों पर 7 दिन पहले LG से मंजूरी लेनी होगी

    नई दिल्ली : दिल्ली में उपराज्यपाल की शक्तियां बढ़ाने वाला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार विधेयक यानी NCT एक्ट बुधवार को राज्यसभा में पास करा लिया गया। बिल पेश होने के बाद राज्यसभा में काफी हंगामा हुआ। लेफ्ट की कांग्रेस पार्टी सहित चार दलों ने बिल का विरोध करते हुए सदन की कार्रवाई से वॉकआउट किया। लेकिन बिल के पक्ष में बहुमत होने के बाद उप सभापति ने उसे पास कर दिया। वही लोकसभा में बीजेपी पहले ही पास करा चुकी है।

    आपको बता दे दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार हैं। तो वही दिल्ली सरकार की तरफ से आम आदमी के सांसद संजय सिंह ने बिल को अलोकतांत्रिक बताया हैं। उन्होंने कहा कि इस बिल से साबित हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से डरते हैं। कई राज्यों में आम आदमी पार्टी का विस्तार हो रहा है। इससे घबराकर ये बिल लाया गया है। वही बिल पास होने के बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर बिल के विरोध में नाराजगी जताते हुए कहा कि GNCTD अमेंडमेंट बिल पास होना दिल्ली के लोगों का अपमान है। यह विधेयक उन लोगों से अधिकार छीनता है जिन्हें लोगों ने वोट देकर चुना है और जो लोग हार गए थे उन्हें दिल्ली चलाने के लिए शक्तियां देता हैं। BJP ने लोगों को धोखा दिया है।

    राज्यसभा में समाजवादी पार्टी से सांसद विशंभर प्रसाद निषाद ने बिल के विरोध में संसद की कार्रवाई से वॉकआउट किया। उन्होंने बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये बिल असंवैधानिक है। ओडिशा की पार्टी बीजू जनता दल से सांसद प्रसन्ना आचार्य ने भी बिल के विरोध में रोष जताते हुए कहा कि हमारी पार्टी ने तय किया है कि वो इस बिल का समर्थन नहीं करेगी। ये बिल चुनी हुई सरकार की ताकत को कम करता है। बिना किसी हंगामे के हम सदन से वॉकआउट कर रहे हैं।

    लोकसभा में बिल पेश करते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा था कि ये बिल लाना जरूरी हो गया है। दिल्ली सरकार का स्टैंड कई मुद्दों पर क्लियर नहीं रहा है, इसलिए कुछ मामले अदालतों में भी चल रहे हैं। तो इनमें कुछ फैसले भी आ चुके हैं। कोर्ट ने यह भी फैसला दिया है कि सिटी गवर्नमेंट के एग्जीक्यूटिव इश्यू पर LG को सूचना दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा था कि इसे राजनीतिक विधेयक नहीं कहना चाहिए। दिल्ली केंद्रशासित प्रदेश है। इस बिल से प्रशासन के कामकाज का तरीका बेहतर होगा।

    NCT एक्ट के तहत दिल्ली के उपराज्यपाल को कुछ अतिरिक्त शक्तियां मिलेंगी। इसके बाद दिल्ली सरकार को उपराज्यपाल से कुछ मामलों में मंजूरी लेनी जरूरी हो जाएगी। संशोधित बिल के मुताबिक दिल्ली सरकार को विधायिका से जुड़े फैसलों पर LG से 15 दिन पहले और प्रशासनिक मामलों पर करीब 7 दिन पहले मंजूरी लेनी होगी।